महिलाओं की वो टॉप 10 फिल्में, जो बदलती हैं समाज की सोच!
इन प्रेरणादायक कहानियों में है शक्ति, संघर्ष और सशक्तिकरण का संदेश।
पिंक (2016) का मशहूर डायलॉग: "No means No!" यह तीन लड़कियों की न्याय की लड़ाई है, जो दिखाती है कि सहमति सबसे बड़ा अधिकार है।
थप्पड़ (2020) ये फिल्म की कहानी एक थप्पड़ ही काफी है आत्म-सम्मान को झकझोरने के लिए। फिल्म घरेलू हिंसा के खिलाफ खड़ी होती है।
मर्दानी (2014): एक महिला पुलिस ऑफिसर की साहसी कहानी जो बाल तस्करी के खिलाफ लड़ती है।
चक दे! इंडिया (2007): महिला हॉकी टीम की जीत, नेतृत्व और एकजुटता की प्रेरणादायक कहानी।
दंगल (2016): बेटियां बेटों से कम नहीं – पहलवान गीता और बबिता की असली कहानी।
गंगूबाई काठियावाड़ी (2022): एक वेश्यालय की मालकिन से महिला अधिकारों की आवाज़ तक का सफर।
इंग्लिश विंग्लिश (2012): एक गृहिणी की आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणादायक यात्रा – आत्म-सम्मान और पहचान की खोज।
क्वीन (2014): जब रिश्ता टूटा, तब जिंदगी शुरू हुई। स्वतंत्रता की तरफ एक अकेली लड़की की यात्रा।
आरक्षण (2011): आरक्षण, शिक्षा और सामाजिक बराबरी जैसे मुद्दों पर महिला शिक्षिका की अहम भूमिका।
मिमी (2021): सरोगेसी जैसे संवेदनशील विषय पर आधारित – एक महिला की ममता और बलिदान की कहानी।
इन फिल्मों ने दिखाया कि महिलाएं सिर्फ किरदार नहीं, परिवर्तन की आवाज हैं। बताएं आपको कौन सी फिल्म ने सबसे ज्यादा प्रेरित किया?