Holi 2025: तिथि, मुहूर्त, महत्व और उत्सव की अनोखी परंपराएं
होली को भारत में रंगों का त्योहार कहा जाता है। यह पर्व सद्भावना, प्रेम, उल्लास और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है।होली पूरे भारत में हर्षोल्लास और उमंग के साथ मनाई जाती है।

इस लेख में हम Holi 2025 की तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व, और विभिन्न राज्यों में इस त्योहार को मनाने के अनोखे तरीकों के बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे।
Holi 2025 कब है? (Holi 2025 Date and Time)
होली का पर्व दो दिनों तक मनाया जाता है—पहले दिन होलिका दहन (छोटी होली) और दूसरे दिन रंगों की होली (बड़ी होली)।
Holi 2025 की तिथि और शुभ मुहूर्त
➡️ होलिका दहन: 13 मार्च 2025 (गुरुवार)
⏳ शुभ मुहूर्त: सायंकाल 06:24 बजे से 08:51 बजे तक
➡️ रंगों की होली: 14 मार्च 2025 (शुक्रवार)
होली पूजा विधि और शुभ योग (Holika Dahan Puja Vidhi & Shubh Yog)
होली का त्यौहार फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। इस दिन होलिका दहन किया जाता है, जो असत्य पर सत्य की जीत का प्रतीक है। होलिका दहन के दिन लोग लकड़ी और उपले एकत्रित करके होली जलाते हैं और उसमें गेंहू की बालियां, नारियल, हल्दी, चंदन और मिठाई अर्पित करते हैं।
होली का धार्मिक और पौराणिक महत्व (Holi 2025 Significance & Mythological Stories)
1. प्रह्लाद और होलिका की कथा
होली का सबसे प्रसिद्ध पौराणिक संदर्भ भक्त प्रह्लाद और होलिका से जुड़ा हुआ है। प्रह्लाद भगवान विष्णु के अनन्य भक्त थे, लेकिन उनके पिता हिरण्यकश्यप स्वयं को ईश्वर मानते थे और विष्णु भक्ति से नफरत करते थे।
हिरण्यकश्यप ने अपने पुत्र को मारने के लिए अपनी बहन होलिका को आग में बैठाने को कहा, क्योंकि उसे वरदान था कि आग उसे जला नहीं सकती। लेकिन भगवान विष्णु की कृपा से प्रह्लाद सुरक्षित रहे और होलिका जलकर भस्म हो गई।
तभी से इस दिन होलिका दहन किया जाता है, जो बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है।
2. राधा-कृष्ण और ब्रज की होली
मथुरा और वृंदावन में राधा-कृष्ण की होली विशेष रूप से प्रसिद्ध है। कहा जाता है कि भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी सखी राधा और गोपियों के साथ रंगों की होली खेली थी, जो आज भी बरसाना, नंदगांव, और वृंदावन में बड़े धूमधाम से मनाई जाती है।
3. शिव-पार्वती और होली का संबंध
एक अन्य कथा के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए कामदेव को उनकी साधना भंग करने भेजा, जिससे भगवान शिव क्रोधित होकर कामदेव को भस्म कर दिया। बाद में, देवी रति के प्रार्थना करने पर कामदेव को पुनः जीवन मिला। इस घटना को भी होली पर्व से जोड़ा जाता है।
होली का सांस्कृतिक और सामाजिक महत्व (Cultural & Social Importance of Holi 2025)
1. समाज में एकता और प्रेम का संदेश
होली जाति, धर्म, वर्ग, और समाज की दीवारों को तोड़कर सबको एक सूत्र में बांधने वाला पर्व है। इस दिन शत्रु भी मित्र बन जाते हैं और सभी आपसी द्वेष भूलकर प्रेमपूर्वक गले मिलते हैं।
2. रंगों की मस्ती और उमंग
होली का पर्व रंगों और उल्लास का त्योहार है। इस दिन लोग गुलाल, अबीर और प्राकृतिक रंगों से एक-दूसरे को रंगते हैं, नृत्य-संगीत करते हैं और मिठाइयों का आनंद लेते हैं।
3. होली के विशेष पकवान
होली के दिन विशेष रूप से गुजिया, ठंडाई, मालपुआ, दही भल्ले, कचौड़ी और पापड़ बनाए जाते हैं। भांग वाली ठंडाई भी होली का एक विशेष आकर्षण होती है।
भारत में होली के अनोखे रंग (Different Types of Holi Celebrations in India)
1. ब्रज की लट्ठमार होली (Barsana Lathmar Holi)
उत्तर प्रदेश के बरसाना और नंदगांव में लट्ठमार होली मनाई जाती है, जहां महिलाएं पुरुषों को लाठियों से मारती हैं और पुरुष ढाल लेकर खुद को बचाने की कोशिश करते हैं।
2. वृंदावन और मथुरा की फूलों की होली (Phoolon Ki Holi)
वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर और मथुरा के द्वारकाधीश मंदिर में फूलों की होली खेली जाती है, जिसमें केवल गुलाब, गेंदे और केसर के फूलों का उपयोग किया जाता है।
3. शांति निकेतन की सांस्कृतिक होली
पश्चिम बंगाल के शांति निकेतन में रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा शुरू की गई ‘बसंत उत्सव’ की होली बड़ी धूमधाम से मनाई जाती है। इसमें छात्र-छात्राएं गीत-संगीत और नृत्य के माध्यम से बसंत ऋतु का स्वागत करते हैं।
4. पंजाब की होला मोहल्ला होली (Holla Mohalla Festival)
पंजाब में सिख समुदाय द्वारा होला मोहल्ला मनाया जाता है, जिसमें घुड़सवारी, मार्शल आर्ट, और परेड का आयोजन किया जाता है।
होली खेलने के सुरक्षित और प्राकृतिक तरीके (Safe & Eco-Friendly Holi 2025 Tips)
- प्राकृतिक रंगों का उपयोग करें, जैसे हल्दी, चुकंदर, और गुलाब की पंखुड़ियों से बने रंग।
- केमिकल रंगों से बचें, क्योंकि ये त्वचा और आंखों के लिए हानिकारक हो सकते हैं।
- पानी बचाएं और सूखी होली खेलने का प्रयास करें।
- खेलने से पहले नारियल तेल या सरसों का तेल त्वचा पर लगाएं, ताकि रंग जल्दी निकल जाए।
Holi 2025 सिर्फ रंगों का पर्व नहीं, बल्कि यह प्रेम, भाईचारे और आनंद का त्योहार है। यह बुराई पर अच्छाई की जीत, नई ऊर्जा, और जीवन में खुशियों के रंग भरने का संदेश देता है। इस होली को अपने परिवार और दोस्तों के साथ उल्लास और सुरक्षित तरीके से मनाएं और रंगों की इस बहार में खुद को पूरी तरह से सराबोर कर लें।
होली की ढेरों शुभकामनाएं!
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