कॉफी का सफर: बीज से कप तक

कॉफी की कहानी बीज से शुरू होती है। इसे "कॉफी चेरी" नाम के फल से निकाला जाता है।

कॉफी चेरी लाल रंग का फल होता है। इसके अंदर छोटे-छोटे कॉफी बीज छिपे रहते हैं।

कॉफी के पौधे ऊँचाई वाले ठंडे इलाकों में उगते हैं। अफ्रीका, ब्राज़ील, वियतनाम और भारत इसके बड़े उत्पादक हैं।

कॉफी के पौधे में पके हुए चेरी फलों को हाथ से तोड़ा जाता है।

चेरी फलों को दबाकर बीज अलग किए जाते हैं। फिर इन्हें धोकर सुखाया जाता है।

कॉफी के सुखे हुए बीजों को अलग-अलग तापमान पर भूनते हैं।यहीं से कॉफी की खुशबू और स्वाद आता है।

भुने हुए कॉफी के बीजों को पीसकर पाउडर बनाया जाता है।फिर गर्म पानी या दूध के साथ मिलाकर कॉफी तैयार होती है।

एक लंबी यात्रा के बाद…आपके कप में आती है ताज़ी, महकदार कॉफी। 

"अगली बार जब कॉफी पिएंगे, ये सफर ज़रूर याद आएगा। एक कप कॉफी थकान मिटाकर खुशी और परिवार संग पल खास बना देती है।"